माना है असंभव ‘चाँद’ को पाना
पर दिल पर किस का ज़ोर है ‘जाना’
जिद्द है इसकी चाहेगा वही
जिसे पाने में करनी पड़े जद्दो-जहद ..
गर होसलों में उड़ान न हो
जुस्तजु दीदार-ए-यार न हो
नहीं ऐसी शक्सियत की ख्वाइश मुझे
जो हाथ में न कैद कर सके
उस चाँद की चादनी
और ज़हन में ‘उसका’ अक्स...........पूनम(ss)