ख़याल है पन्ने .....ज़हन एक किताब ............
.....poonam
Saturday, October 29, 2016
आकर तुम मत जाना.
›
. जब आँगन में मेघ निरंतर झर-झर बरस रहे हों ऐसे में दो विकल हृदय मिलने को तरस रहे हों जब जल-थल सब एक हुए हों, धरती-अम्बर एकम शो...
‹
›
Home
View web version