ख़याल है पन्ने .....ज़हन एक किताब ............
.....poonam
Monday, March 6, 2017
ग़ज़ल
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उफ़्फ़! कितना बदल गई हूँ मैं शम्अ जैसे पिघल गई हूँ मैं क्या यही मैं थी , क्या वही मैं हूँ किसके पैकर में ढल गई हूँ मैं अब क...
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