ख़याल है पन्ने .....ज़हन एक किताब ............
.....poonam
Tuesday, May 16, 2017
शोचनीय .........
›
किसी भी बर्तन की तरह ख़ुद को भीतर से मांजना अधिक पड़ता है ........... क्योंकि पात्र में वस्तु अन्दर ही परोसी जाती है .......पुन: -पुन: उप...
‹
›
Home
View web version