ख़याल है पन्ने .....ज़हन एक किताब ............
.....poonam
Saturday, June 28, 2025
ग़ज़ल ........ पूनम माटिया
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सुलगता रहा इक शरर धीरे धीरे जलाता रहा वो ये घर धीरे धीरे मचाया हवाओं ने कुहराम ऐसा गिरा टूट कर हर समर धीरे धीरे दिये ज़ख़्म नफ़र...
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