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Thursday, May 7, 2015

‘भाभी जी’ क्या कहता है यह शब्द ......


Delhiuptodate akhbaar mei prakashit ye lekh ...... aap zaroor padhen ...... aur apni pratikriya se awagat kraayen .....

‘भाभी जी घर पर हैं ???’ इस शीर्षक से एक सीरियल आजकल एक टीवी चैनल पर आ रहा है| हास्य प्रधान इस सीरियल को देखते हुए एक ख्याल आया ज़ेहन में .... ‘भाभी जी’ कितना सरल ,सहज ,अपनत्व से भरा संबोधन है यह| दरअसल भाई की पत्नी भाभी कहलाती है जिसमें  माँ समान आदर-सम्मान के साथ स्नेह और चुलबुली शरारतें उपहार के तौर पर स्वत: ही चली आती हैं|
 ‘भाभी’ शब्द जब विस्तृत पटल पर इस्तेमाल होता है तो दोस्त की पत्नी भी भाभी होती है लेकिन वहां इज्ज़त से बढ़कर बराबरी और मज़ाक करने का हक़ अधिक मिल जाता है ...हलके-फुल्के हंसी-मज़ाक के साथ कुछ ज़्यादा ही सीमाएं भी लांघने लगते हैं जैसे कि भाभी कह देने भर से ही वे अधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने के लिए स्वतंत्र हो गए|
‘नन्द-भाभी’ का रिश्ता अलग से पूर्ण लेख मांगता है इसलिए इस जाविये से मैं ‘भाभी’ शब्द को यहाँ अलग रख रही हूँ|

शादी के बारें में कहा जाता है कि ‘यह वह लड्डू है जो खाए वो पछताए और जो न खाए वो भी पछताए’ अर्थात शादी करने के लिए दिल जिस तरह से उछाल मारता है, जिस तरह की उत्तेजनाएं बढाता है , जिस तरह से तत्परता दिखाते हैं दोनों ही पक्ष–लड़का और लड़की, उतना ही  या उससे भी अधिक पछतावा, पीढ़ा दिखाई देने लगती है शादी-शुदा जोड़ों ख़ासकर लड़कों के मुख पर|
नहीं मैंने कोई अतिश्योक्ति नहीं की यह कहकर| जहाँ मर्ज़ी देख लीजिये.....शादीशुदा पुरुषों के अपनी पत्नी की चिकचिक, उसके बदले हुए रूप  ‘खूबसूरत से बद्स्वरूप’ से परेशान  होने के किस्से और चुटकुले ही पढने-सुनने को मिलते हैं और ऐसे पुरुषों के लिए ‘भाभी जी’ का महत्त्व और अधिक बढ़ जाता है| ‘भाभी जी’ के निकट आते ही उनकी बांछे खिलने लगती हैं, ‘उनकी’ बातों से फूल झड़ते नज़र आते हैं उन्हें, ‘वे’ सौन्दर्य की देवी या कोई अप्सरा प्रतीत होने लगती हैं| घर में पत्नी की ज़रा सी बात पर  भड़कने वाले ऐसे ‘भाभीजी’ के प्रशंसक उनकी हर बात पर  अपना दिल बिछा ही डालते हैं मानो ‘भाभीजी’ न हुईं बल्कि इंद्र की सभा से सीधे अवतरित किसी अप्सरा का सानिध्य उन्हें मिल रहा हो|
अब उस सीरियल की ही बात पर वापस आयें तो देखेंगे कि अपने-अपने पतियों से प्यार करने वाली दोनों ही महिलाओं को ‘भाभी जी, भाभी जी’ कहने वाले ये पुरुष अपनी कोशिशों में कतई कमी नहीं करते यह जताने में कि वे उन्हें उनके पतियों से अधिक प्यार करते हैं ‘भाभीजी’ को  और उनके लिए चाँद-तारे तोड़ लाने में भी पीछे नहीं हटेंगे| सीरियल तो खैर सीरियल ही होता है ....’थोड़ी आग़ और ज़्यादा धुआं’ तथा  हंसने–हंसाने का माध्यम जान इन्हें हम हलके में लेके छोड़ सकते हैं .....पर यह सच है कि अधिकांश (सब नहीं) पुरुष ‘भाभीजी’ शब्द को संजीदगी से नहीं लेते और इसलिए उनकी बातें भी सीमाओं को लांघती रहती हैं|

 अब सोशल साईटस या नेट पे देखें तो एक क़दम और आगे नज़र आते हैं लोग .......किसी भी आयु के युवक झट से दोस्ती की सीमा लांघ महिला मित्र को ‘भाभी’ कहने में देर नहीं लगाते| यहाँ मैं साफ़ कर दूँ कि अपवाद हर जगह होते हैं और देवर-भाभी के रिश्ते की सात्विकता को निभाने वाले भी कम नहीं| बात तो उनकी  है जो ‘भाभी’ शब्द की आढ़ में कुछ भी कह देना अपना धर्म समझते हैं, वे भूल जाते हैं कि अगर किसी को भाभी कहा है तो उसका पति स्वत: ही बड़ा भाई हो जाता है| स्वार्थ के इस दौर में लोग ऐसी बातें तो आसानी से नज़र अंदाज़ कर जाते हैं जो उनके पक्ष में न हों या उनकी स्वार्थ सिद्धि या आनंद में अवरोध  उत्पन्न करती हों|
कई जगह तो ‘भाभीजी’ शब्द अश्लीलता की सब सीमायें पार कर जाता है और देखने को मिलता है कि सोशल साइट्स पर इस शीर्षक से अश्लील पृष्ठ और तस्वीरें मिलती हैं ....ऐसे में कोई आपको ‘भाभी’ कहकर संबोधित करे तो खुद पर ही संदेह होने लगता है कि आखिर आप हैं कौन ???????
इस लेख के माध्यम से मैं उन सभी से पुरुषों को सावधान करना चाहती हूँ यह बताते हुए  कि कृपया ध्यान दें कि अगर आप ‘भाभी’ शब्द का गलत उपयोग कर अपनी मर्यादा को लांघ किसी स्त्री की मर्यादा को अपने अल्प आनंद के लिए ताक पर रख रहें हैं तो यह न भूलें कि आपकी पत्नी ,बहिन या माँ को भी ‘भाभीजी’ कहने वालों की कमी नहीं| 

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पूनम माटिया
दिलशाद गार्डन , दिल्ली  

poonam.matia@gmail.com