"विश्व रिकार्ड
होल्डर" डॉ. पूनम माटिया द्वारा सृजित
"शज़र पे चाँद
उगाओ" (ग़ज़ल संग्रह) की
बिखरतीं ख़ुशबुएँ
जहाँ तक ग़ज़ल का सवाल है तो ग़ज़ल में प्रेम भावनाओं का श्रंगारिक चित्रण होता है क्योंकि ग़ज़ल का शाब्दिक अर्थ ही प्रेम की बातें करने से लिया जाता है। ग़ज़ल की असली कसौटी प्रभावोत्पादकता है, जिसमें इश्को-मुहब्बत की बातें सच्चाई और असर के साथ लिखी जायें। इसी लिये उसी ग़ज़ल को अच्छा माना गया है जिसमें असर और मौलिकता हो। ग़ज़ल वही असरदार होती है जिसमें प्रतीकों के माध्यम से अपनी कही गयी हो लेकिन वासनात्मक प्रभाव दूर रहे।
ग़ज़ल के कलेवर में रदीफ़ और काफ़िये का महत्वपूर्ण स्थान है, इसी लिये कहा गया है कि 'गति ही साहित्य की आत्मा है'। इन सभी मानकों पर कवयित्री पूनम माटिया सफल रही हैं। साहित्य सदैव युग, परिवेश, समाज, व्यक्ति और काल के अनुरूप बदलता है और उन परिवर्तनों के साथ-साथ कवि की लेखनी चलती है, इसी लिये कवि का मौलिक चिंतन सुन्दर और असरदार होता है। अपने इस ग़ज़ल संग्रह "शज़र पे चाँद उगाओ" में कवयित्री पूनम माटिया ने पूर्ण रूपेण कवि धर्म को निभाया है।
यह ग़ज़ल संग्रह साहित्य जगत में अपनी पहचान बनाने में सफल रहेगा। इस संग्रह में कवयित्री पूनम माटिया का शब्द संयोजन एवं ग़ज़ल के मिसरों का संयोजन अपनी अलग ही पहचान छोड़ता है।
कवयित्री पूनम माटिया
बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं, उन्होंने वर्तमान
परिवेश को लेकर प्रकृति, आदमी, देश, समाज के विभिन्न बिंदुओं पर प्रतीकों द्वारा सन्देश प्रेषित कर इस कृति का
प्रणयन किया है, आप निस्संदेह
साधुवाद की पात्र हैं। आपका इस कृति के विभिन्न पेंतालीस शीर्षकों को ग़ज़ल के रंगों
से सुशोभित करने का सफल प्रयास है, मैं इस मौलिक
कृति के सृजन के लिये कवयित्री डॉ.पूनम माटिया को बहुत बहुत बधाई और अशेष
शुभकामनायें देता हूँ।
आपने साहित्य, कला, काव्य, शिक्षण, गौ सेवा, पर्यावरण और विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में अपना योगदान
देते हुए विश्व रिकार्ड कायम किया है तथा आपके साहित्यिक अवदान के लिये आपको उच्च
श्रेणी की संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित किया गया है। आपका योगदान सराहनीय
है तथा भारतीय साहित्य जगत की धरोहर है। सुकवयित्री द्वारा प्रस्तुत अभिव्यक्ति
उचित शब्द संयोजन एवं सुन्दर कलेवर व सुगठित काव्य सौष्ठव के साथ सराहनीय है।
उम्दा ग़ज़लों के साथ सुकवयित्री डॉ. पूनम माटिया जी को कृति के प्रणयन के लिये बहुत
बहुत बधाई एवं साधुवाद व शुभकामनायें।
👇 कृति की कुछ काव्यात्मक समीक्षा 👇
विश्व में साहित्य-गान
कायम की पहचान
भारतीयता का भाव खूब चहका रहीं
काव्य-कला-शिक्षण-साहित्य पर्यावरण भी
सेवा के संग अन्य दायित्व निभा रहीं
सामाजिक सेवा में निरंतर हैं लीन आप
किन्तु नाम साहित्य में भी अतुल्य पा रहीं
'शज़र पे चाँद उगाओ'
से आप पूनम जी
साहित्यिक आँगन को ख़ूब महका रहीं।।
हिन्दी और उर्दू की
इबारत में साथ-साथ
शजर पे
चाँद गज़लों में ही उगाया है
पैंतालिस खण्डों में विभक्त रचनाएँ लिखीं
रौशनी को, रात को भी कृति
में सजाया है
उम्र सभी उतनी ही जीते हैं मिली जो "देव"
ग्रन्थ में आध्यात्म का भी रंग बिखराया है
यादों-संग रिश्तों का भी आपने किया है मेल
मानव की प्रकृति को ग्रन्थ में बताया है।।
'शज़र पे चाँद उगाओ' कृति में ग़ज़लों का
गुंफित नज़ारे में लिबास प्यारा-प्यारा है
ग़ज़लों से ही नहीं अमल से निभाना भी तो
अदब को
भावना में आपने संवारा है
उल्फ़तों के खेत में फसल बोई ग़म की भी
बंद पलकों में आँसुओं को भी उतारा है
सोते रहे ओढ़ काली रात को अमावस की
"पूनम" जी आपने बताया हाल सारा है।।
अनमिट यादों की भी चिट्ठी का कराया ज्ञान
रोने और हँसने का अर्थ समझाया है
ज्वालामुखी बनकर फूट
पड़ती है कब
मुस्कान पे हँसने से आपने चेताया है
इश्क़ होता क्या है यही ग़ज़ल में पूछा प्रश्न
बारिश का पलकों से मेल भी कराया है
दर्द की बिसात के भी साथ-साथ कहा 'देव'
वक़्त ने भी जुल्म का
क़हर कैसा ढाया है।।
मानसिकता भी कैसी हो गयी है आदमी की
शब्द-शब्द में विवेक बिखराया आपने
अपनी तो ग़लती भी ग़लती न होती कभी
खोट वाले सिक्के को भी है चलाया आपने
कृति का कलेवर भी शोभित हुआ विशेष
लेखनी के रंगों से जिसे सजाया आपने
अपना किया ही सामने आता है एक दिन
"शज़र पे चाँद उगाओ"
में गाया आपने।।
आदमी से आदमी का कैसा हो गया है भाव
नज़रों में धोखे को कठिन बतलाया है
बदन से
मरने से भी
अधिक दुखदायी
मन से मरा जो नाम आपने सुझाया है
समझाया आपने कि मुश्किल उठा है कभी
नज़रों ने एक बार जिसको गिराया है
दरिया-समुन्दर के पार भी जो प्यासा रहे
ग्रन्थ में बताया पार उसका न पाया है।।
ग्रन्थ में है इश्क़ की कहानी जोड़ी आँसुओं से
कैसे डसता है इश्क़ आदमी को प्यार में
कैसे-कैसे होता कभी मिलतीं उदासियाँ भी
तल्ख़ियों का रंग कैसे छा जाता बहार में
चाहत के रंग भी लिखे हैं निज लेखनी से
इश्क़ की नदी का भी उफ़ान लिखा धार में
आपने किया जवानी कमसिन का भी ज़िक्र
रह जो रही थी कभी सभी की पुकार में।।
''शजर पे चाँद उगाओ'' लिखा है ग्रन्थ प्रिय
जिसमें क़सम सात जन्मों की भी खायी है
आज़माने की चुनौती का कर डाला प्रश्न
आस भरी फ़ितरत उसकी बतायी है
अशआर फ़ुरक़त में भी लिखे जिसकी जो
चाह गुनगुनाने की भी आपने सजायी है
क़िस्मत भी कोहरे की आपने लिखी है 'देव'
फूल और काँटों की भी बात
समझायी है।।
भारतीयता को लिखा पूनम जी ग़ज़लों में
आदर्शों पर धूल पड़ी लिख डाली आपने
नज़र हैरान है सुखनवर की भी लिखा
तीरगी-ओ-रौशनी भावों में पाली आपने
नज़रों से दिल में है होता घर कैसे भला
ग़ज़लों की श्रृंखला है रच डाली आपने
मरमर के बदन पर चाँदनी ज्यों डाली
भर डाली भावना भी मतवाली आपने।।
पूनम जी आपकी ग़ज़ल सभी आली-आली
जिनमें सवाल का जबाव ढूंढती रहीं
बेवफ़ाई की मिसाल बनने दिया न इश्क़
लेकिन नसीहतों से जान फूँकती रहीं
गिले और शिकवों को मन से मिटा दें "देव"
ग़ज़लों में इसी भावना में टूटती रहीं
"शजर पे चाँद उगाओ"
सृजित भव्य ग्रन्थ
वाह-वाही का ख़ज़ाना ख़ूब लूटती रहीं।।
सुकवयित्री पूनम माटिया जी द्वारा "शजर पे चाँद उगाओ" (ग़ज़ल संग्रह) कृति का प्रणयन साहित्य के लिये विशेष साहित्यिक-अनुदान है| आपका यह ग़ज़ल संग्रह निश्चित ही ग़ज़ल के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि है जिसके लिए आपको बहुत-बहुत बधाई एवं साधुवाद|
शुभकामनाओं सहित
देवेन्द्र देव मिर्ज़ापुरी
बुलंदशहर – 203001
मो. 9412227127

