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| pic courtsey.....Bharat Patel |
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हर पल आज़माइश के क़गार पर ही ख़ुद
को खडा पाते हैं
एक इम्तिहान से उभर नहीं पाते हैं
हम अभी
सामने एक नयी समस्या से फिर जूझते
नज़र आते हैं
जीना पड़ता है ‘आज’ में हर किसी को
पर इस ‘आज ‘ को हरदम ‘कल’ की गिरफ़्त
में ही पाते हैं
खुशियों का रेला लगा हो चारों ओर
बेशक
दुखों का भँवर घेर लेगा कब
इसी पशो-पेश में ही ख़ुद फंसा पाते हैं
इसी पशो-पेश में ही ख़ुद फंसा पाते हैं
दिल शीशे का नहीं ,काफ़ी मज़बूत है
जानते हैं हम
पर इसके टूटने का ही शोक मनाते नज़र
आते हैं
अच्छा नहीं इतना उदासीन रवैया,
जानते हैं सभी
फिर भी दुखों में डूब कर ही क्यों ग़ज़ल उभार पाते हैं......poonam (AR)
naye roop mei
https://www.facebook.com/photo.php?fbid=708978335811425&set=a.161596750549589.31174.100000977958389&type=1&comment_id=2411288&offset=0&total_comments=21&ref=notif¬if_t=photo_comment
फिर भी दुखों में डूब कर ही क्यों ग़ज़ल उभार पाते हैं......poonam (AR)
naye roop mei
https://www.facebook.com/photo.php?fbid=708978335811425&set=a.161596750549589.31174.100000977958389&type=1&comment_id=2411288&offset=0&total_comments=21&ref=notif¬if_t=photo_comment
