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Thursday, December 20, 2012

एक आवाज़ उठेगी तो सौ संग में जुड़ जाएँगी.........


देश की राजधानी में एक लड़की की अस्मत दागदार ,तार तार हुई है .......ऐसे में कोई कैसे हंस सकता है ........सभी को अपनी शक्ति के अनुसार इस घटना का विरोध करना चाहिए और खासकर एक लेखक और कवी को अपने शब्दों के माध्यम से अपना योगदान देना चाहिए ........



दिल पे अघात हुआ है 
अबला पे अत्याचार  हुआ है 

सियासतदारों की नाक के नीचे 
रक्षा के लिए प्रतिबद्ध 
संविधानी तौर पे कटिबद्ध 
पुलिसकर्मियों की खुली आँखों के सामने 
जन सुविधाओं के चालकों ने 
देश की अस्मत पर कुठाराघात किया है 

ऐसे में हम कैसे रहे शांत 
कैसे न उठाये आवाज़ 
क़ानून को ललकारना होगा 
घ्रणित ,विक्षिप्त मानसिकता को 
जड़ से उखाड़ना होगा 

एक आवाज़ उठेगी तो 
सौ संग में जुड़ जाएँगी 
शायद सरकार के कान पे 
जूँ कोई रेंग जायेगी 

एक आवाज़ उठेगी तो 
सौ संग में जुड़ जाएँगी 
शायद सरकार के कान पे 
जूँ कोई रेंग जायेगी .................................पूनम.

10 comments:

  1. desh mei jo aaj paristithi hain ...jo haalat hai ...usko sahi shabd diye hain...Poonam ....aaj desh ke ajeeb halat hai......dohri mansikta kaam kar rahi hain...log apni sanskriti ko dakiyanusi bolte hain..par dusri ko apna bhi nahi paate...ghar mei unhe bhartiya mansikta chahiye to bahar...pashchimi....par yeh bhool jaate hai ki wo bhi kisi ke ghar ki bahu beti hain.....jiski wajah se aaj..yeh sab ho rahaa hain..aur itni teji se ho rahaa hain ki...sochte huye dar lagta hain.......is post ko daale lagbhag ek ghanta ho chuka hain....aur sarkari aakdo ke hisaab se ...3 mahilayo ki ijjat taar-2 ho chuki hogi...ji haan.....har ghante 3 ladkiyo ke sath yeh ghatna ho rahi hain....kal bhi maine ek bat likhi thee....
    //आज एक केस ने जिसको उठाने में मीडिया ने अहम भूमिका निभाई हैं ...सारी जनता को उठा दिया हैं..वरना तो आज देश की यह हालत है की हर घंटे ३ रेप केस होते हैं ...आज अपने २ घंटे के एक प्रोग्राम के बाद एंकर ने बताया की...हमारी इस चर्चा के दौरान ही देश में ६ रेप केस हुए हैं...जिनमे २ बच्चियां हैं..पर सब un notice चले जाते हैं...कोई उठाने वाला नहीं मिलता...पर इस बार मीडिया ने एक अच्छा काम किया हैं....क्योकि यह अपने आप में ही घिनौना हैं केस है.......पिछले ४० सालो में भारत देश में......रेप केस में ८७५% इजाफा हुआ हैं ...तो सोचा जा सकता है की देश की हालत किया हैं ...और नारी की हालत क्या हैं......पर नेता क्यों कुछ करने लगे..यह भी सोचने का विषय हैं.....अब यह लोग दबंग के नाम पर ऐसे ही लोगो को चुनाव में टिकट देते हैं......अगर कानून बन भी जाता हैं तो सबसे पहले उनके नेता पर ही आंच आएगी..जिसे कोई चाहेगा नहीं...वैसे भी देश में कानून को implement होने का सबको पता हैं...चाहे फांसी इस की सज़ा हो..या फिर chemical castration....इसे implement करेगा कौन....पुराने केस का रिकार्ड सबको पता हैं....चाहे वो स्वीडन की महिला के रेप का केस हो या बिट्टी मोहंती वाला रेप केस....कुछ नहीं हुआ किसी को अभी तक....ऐसे ही न जाने कितने केस हैं....आज..सज़ा कोई हो..पर सबसे ज्यादा जरूरी हैं ...उसकी investigation सही से हो और केस की फाइल सही से बनायी जाए...वरना...तो अदालत भी क्या करेंगी चाहे वो फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट हो या कुछ और...जिस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा....//.....aaj hume do level per kaam karne ki jaroorat hain..agar is baat se mukti chahiye.....jaise maine apni post mei bhi likha hain....
    //जहां एक तरफ कड़े कानून चाहिए ..जिसमे एक निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत पीढित को न्याय दिलवाया जाए..वही...समाज को सही दिशा दी जाए...उसमे खासकर महिलायों के किरदार को सही से बताया जाए ...जिसमे सरकार के साथ-२ हमारे लेखक/कहानीकारों /फिल्म –सिरिअल्स निर्माताओ की भूमिका बहुत अहम हैं.... //....par ek sachchi aur imaandar approach chahiye...warna to jo hoga hum sabko pataa hain...is case mei sazaa dilwa kar aisa dikha diya jayega ki yeh samsya hi khatm ho gayi.... ..

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    1. shukriya Naresh .......aur sahi kaha tumne ...ye case apne aap mei akela nahi .......har pal kahin kuchh aisa hi ghat raha hai .........logon ka rosh .....bhi ek jwalamukhi ki tarah hain ...........ubaal to tej hota hai ..parantu disha heen ......//जहां एक तरफ कड़े कानून चाहिए ..जिसमे एक निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत पीढित को न्याय दिलवाया जाए..वही...समाज को सही दिशा दी जाए...उसमे खासकर महिलायों के किरदार को सही से बताया जाए ...जिसमे सरकार के साथ-२ हमारे लेखक/कहानीकारों /फिल्म –सिरिअल्स निर्माताओ की भूमिका बहुत अहम हैं.... //....par ek sachchi aur imaandar approach chahiye...warna to jo hoga hum sabko pataa hain...is case mei sazaa dilwa kar aisa dikha diya jayega ki yeh samsya hi khatm ho gayi.... //

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  2. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (22-12-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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    1. @वंदना जी शुक्रिया चर्चा मंच पर मेरी रचना को स्थान देने के लिए

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  3. @सुमित प्रताप जी .....सच कहा आपने //पूनम जी अब वह दिन आने ही वाला है जब जनता ऐसे कुकृत्य करने वालों को ऑन द स्पॉट सज़ा देगी... // इसकी ज़रुरत भी है

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  4. सभी को जिस तरह से भी संभव हो इस उत्पीडन का विरोध करना ही चाहिये. अब यह सब असहनीय हो गया है. इस विचारोत्तेजक प्रस्तुति के लिये शुक्रिया पूनम जी.

    आपका ब्लॉग ज्वाइन भी कर रही हूँ. धन्यबाद.

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  5. रचना जी आप का हार्दिक स्वागत है .....आपका कथन एक दम सटीक है विरोध करना ही हमारे हाथ में है कानून तो अपने हाथ में ले नहीं सकते

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  6. ऐसे में हम कैसे रहे शांत
    कैसे न उठाये आवाज़
    क़ानून को ललकारना होगा
    घ्रणित, विक्षिप्त मानसिकता को
    जड़ से उखाड़ना होगा

    सम्पूर्ण समर्थन

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    1. Rakesh ji samarthan to jan hit mei hai
      dhnywaad

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