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Thursday, December 20, 2012

एक आवाज़ उठेगी तो सौ संग में जुड़ जाएँगी.........


देश की राजधानी में एक लड़की की अस्मत दागदार ,तार तार हुई है .......ऐसे में कोई कैसे हंस सकता है ........सभी को अपनी शक्ति के अनुसार इस घटना का विरोध करना चाहिए और खासकर एक लेखक और कवी को अपने शब्दों के माध्यम से अपना योगदान देना चाहिए ........



दिल पे अघात हुआ है 
अबला पे अत्याचार  हुआ है 

सियासतदारों की नाक के नीचे 
रक्षा के लिए प्रतिबद्ध 
संविधानी तौर पे कटिबद्ध 
पुलिसकर्मियों की खुली आँखों के सामने 
जन सुविधाओं के चालकों ने 
देश की अस्मत पर कुठाराघात किया है 

ऐसे में हम कैसे रहे शांत 
कैसे न उठाये आवाज़ 
क़ानून को ललकारना होगा 
घ्रणित ,विक्षिप्त मानसिकता को 
जड़ से उखाड़ना होगा 

एक आवाज़ उठेगी तो 
सौ संग में जुड़ जाएँगी 
शायद सरकार के कान पे 
जूँ कोई रेंग जायेगी 

एक आवाज़ उठेगी तो 
सौ संग में जुड़ जाएँगी 
शायद सरकार के कान पे 
जूँ कोई रेंग जायेगी .................................पूनम.