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Saturday, November 17, 2012

छट का पावन पर्व



भोर की भई है बेला

नहीं तिमिर का कहीं चिन्ह

सूर्य का साम्राज्य चहू –ओर 

नदिया का पावन तीर


दीया-बाती,


मोहक महक अगरबत्ती की 


पावन-पर्व , श्रद्धा-सुमन


कर–जोड़े, पुलकित मन


सज-धज कर करें


अर्पित हम पुष्प और नीर


छटा यह  न्यारी


निहारे बच्चे ,पुरुष और नारी .........पूनम (स्वप्न शृंगार)