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Friday, March 22, 2013

कशमकश .............


एक खलिश सी है
और प्यार भी
जाने को कहते हैं
और जाने देते नहीं
यही कशमकश है
उम्र के इस पढाव की
ज़रूरत तो महसूस होती है
दूरी की कभी
पर उसकी आदत भी नहीं
दिल बेसबब सा ढूढता है उन्हें
जब वो देखाई देते नहीं
अजब है ऋt, अजब से हाल हैं
पैर मचलते हैं नाचने को
पर भय अनजाना कोई बांध लेता है उन्हें
बातें आती हैं दिल में बहुत कहने को
पर दिमाग यूँही बेफजूल समझ
उन्हें भीतर ही रोक लेता है
‘जाओ’ भी निकलता है मूह से ,पर
दिल एक ज़ंजीर बाँध फिर खींच लेता है
यूँही कशमकश में इंसा एक जिंदगी जी लेता है........ पूनम (अरमान से )