मेरी मित्र सूची - क्या आप सूची में है ?

Tuesday, January 1, 2013

नववर्ष .... नवजीवन



वजूद इंसानियत का रहे कायम 

वक्त का दरिया ले जाये कहीं भी .......पूनम 


मिथ्या है या सच
पर सुना है मैंने यही कथन 

चली जाती है आत्मा
कुछ पल करने को विचरण
रात्रि के किसी पहर में
जब गहरी निंद्रा में होता तन 


जब आत्मा करती
शरीर का फिर से वरण
जागते है हम तभी और
तब होता है नवजीवन


शुष्क, सख्त बीज को मिलता
जब अनुकूल वातावरण
होता है वो तब अंकुरित
तब होता है नवजीवन


फूल खिल के मुरझा जाता
और दे जाता एक दुस्वपन
पर जैसे दिखे नयी कली
तब होता है नवजीवन


अथाह पीड़ा सहती नारी
आँखों में है सुन्दर स्वप्न
जब जनती माँ शिशु को
तब होता है नवजीवन


माँ बाप के आँचल से निकल
बेटी रखती बाहर कदम
पर जब वापिस आये सुरक्षित
तब होता है नवजीवन


मात-पिता की बिटिया प्यारी
सजाती उनका घर आँगन
पर जब बेटी जाती दूजे घर
तब होता है नवजीवन


वृद्धावस्था है एक चुनौती
जानता है यह हर जन
पर बच्चे जब बनते लाठी
तब होता है नवजीवन


पल-पल बदलती इस दुनिया में
भावनाएं बदलती हैं हर क्षण
जन्म लेती है नयी संभावनाएं
तब होता है नवजीवन



पुलकित मन और ऊर्जित तन से
नव वर्ष का हो आगमन
प्रतिपल होते नवजीवन को
आओ करे हम सब नमन.......................................पूनम 




दिल में दुःख सभी के है ....परन्तु आशा और विश्वास का दामन नहीं छोड़ना चाहिए ......पटाखे ,पार्टियां नहीं पर नया करने का जज्बा नहीं त्यागना चाहिए ....................इंसानियत रहे जिन्दा सबमे .......इसी आशा के साथ नव वर्ष का स्वागत  हमें करना चाहिए .....नकारात्मकता किसी समस्या का हल नहीं होता कभी भी ............'दामिनी' और उस जैसी पीड़ित ,आहत किन्तु ज्वाला से भरपूर सभी लड़कियों को हम नहीं भूलेंगे ......एक ज्वाला .एक लौ जैसे जलते रहना है ताकि बदलाव आये ..........