मेरी मित्र सूची - क्या आप सूची में है ?

Friday, August 24, 2012

ज़माल ए हुस्न


आजकल ‘उसका’ भी ये आलम है ‘पूनम’


चाँद आसमां में रहता है मगर 


जिक्र उसका जाने क्यों सरे आम होता है 


रोशन होते हैं चिराग उसके नाम से 


ज़माल से उसके चुंधिया जाती हैं नज़रें 


हर गुलशन का ‘वही’ गुलफ़ाम होता है 


झील सी गहरी उसकी आँखों में नहा कर 


खुद चाँद भी ज़लवा-फ़रोश होता है .........पूनम (AR)