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Friday, August 24, 2012

रूठना-मनाना

मेरी हंसी उन्हें कुछ फीकी सी लगी 


आँखों की चमक कुछ धीमी सी लगी 


पास आकर बोले ,क्या बात है


क्या हमसे कोई हो गयी नादानी 


हम भी बैठे रहे कोने में सकुचाए 


कहा धीरे से उसनेफिर 


क्यों है हमारे सरताज मुरझाए 


ज़रा नज़रें उठाइये ,थोड़ा मुस्कुराइए 


क्यों धडकन पर हो पहरा बिठाए 


जिंदगी हमारी तुम्ही से है


चलो छोडो रूठनाहमें देखना है 


तुम्हारा वही खिल-खिलाके मुस्कुराना..........पूनम (SS)